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उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को 10 साल की कैद

By LSChunav | Publish Date: 3/13/2020 2:41:19 PM
उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को 10 साल की कैद

दिल्ली की एक अदालत ने भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में शुक्रवार को 10 साल की सजा सुनाई। अदालत ने उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हत्या मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को चार मार्च को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया था।

नयी दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में शुक्रवार को 10 साल की सजा सुनाई। जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने सेंगर और उसके भाई अतुल सेंगर को बलात्कार पीड़िता के परिवार को मुआवजे के तौर पर 10-10 लाख रुपये देने का आदेश भी दिया। पीड़िता के पिता की नौ अप्रैल, 2018 को न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी। अदालत ने उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हत्या मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को चार मार्च को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया था। 

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अदालत ने मामले में सात अन्य लोगों के साथ सेंगर को दोषी ठहराया था। सेंगर ने पीड़िता के पिता की मौत में किसी तरह की संलिप्तता से इनकार किया था और कहा था कि उसने कुछ गलत नहीं किया है। बलात्कार के एक अलग मामले में पिछले साल 20 दिसंबर को सेंगर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पीड़िता का 2017 में सेंगर ने कथित तौर पर अपहरण कर बलात्कार किया था। घटना के समय वह नाबालिग थी। सेंगर के साथ माखी पुलिस थाने के प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया और तत्कालीन सब इंस्पेक्टर के पी सिंह, विनीत मिश्रा, बीरेंद्र सिंह, शशि प्रताप सिंह, सुमन सिंह और अतुल (सेंगर का भाई) को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षडयंत्र) तथा अन्य धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया।

अदालत ने अन्य आरोपी कांस्टेबल आमिर खान, शैलेंद्र सिंह, राम शरन सिंह और शरदवीर सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। सीबीआई ने मामले में 55 गवाहों से जिरह की थी और बचाव पक्ष ने नौ गवाहों से जिरह की थी। अदालत ने दुष्कर्म पीड़िता के चाचा, मां, बहन और उसके पिता के एक सहकर्मी के बयान दर्ज किए थे जिसने घटना का चश्मदीद होने का दावा किया था। सीबीआई के अनुसार, तीन अप्रैल 2018 को दुष्कर्म पीड़िता के पिता और शशि प्रताप सिंह के बीच झगड़ा हुआ था। 13 जुलाई 2018 को दाखिल आरोपपत्र में कहा गया कि पीड़िता के पिता और उनके सहकर्मी अपने गांव माखी लौट रहे थे तभी उन्होंने सिंह को (अपने वाहन में) लिफ्ट देने के लिए कहा।

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सिंह ने लिफ्ट देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उनके बीच विवाद हुआ। सिंह ने अपने सहयोगियों को बुलाया। इसके बाद कुलदीप सेंगर का भाई अतुल सिंह सेंगर अन्य लोगों के साथ घटनास्थल पर पहुंचा और महिला के पिता तथा उनके सहकर्मी की पिटाई की। इसके बाद वे महिला के पिता को पुलिस थाना ले गए, जहां उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपपत्र में कहा गया है कि इन सबके दौरान कुलदीप सेंगर जिले के पुलिस अधीक्षक और माखी पुलिस थाने के प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया के संपर्क में था। बाद में उसने उस डॉक्टर से भी बात की जिसने दुष्कर्म पीड़िता के पिता की जांच की थी।

मामले में सेंगर, उसके भाई अतुल, भदौरिया, सब इंस्पेक्टर कामता प्रसाद, कांस्टेबल आमिर खान और छह अन्यों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। पिछले साल एक अगस्त को उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर मामला उत्तर प्रदेश की एक निचली अदालत से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया। जुलाई 2019 में एक ट्रक ने उस कार को टक्कर मार दी, जिसमें पीड़िता अपने परिवार के कुछ सदस्यों तथा अपने वकील के साथ यात्रा कर रही थी। घटना में उसकी दो रिश्तेदारों की मौत हो गई। पीड़िता को लखनऊ के एक अस्पताल से विमान से दिल्ली स्थित एम्स लाया गया। पीड़िता को दिल्ली में ठहराया गया है और वह सीआरपीएफ की सुरक्षा में है।

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