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असम की तेजपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस व भाजपा में छिड़ी जुबानी जंग

By LSChunav | Publish Date: 3/28/2019 4:01:56 PM
असम की तेजपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस व भाजपा में छिड़ी जुबानी जंग

पूर्व नौकरशाह आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले में नवाबुपालेम से आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें चुनाव लड़ने को लेकर अपनी योग्यता साबित करने के लिये दास से कोई प्रमाणपत्र नहीं चाहिए।

गुवाहाटी। असम में तेजपुर संसदीय सीट से उम्मीदवार और प्रदेश में मंत्री भाजपा के पल्लब लोचन दास और पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार एमजीवीके भानु के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। दास ने जहां भानु को बाहरी बताते हुए उन्हें ‘‘सलानी मास’’ (बाहर से आयातित मछली) कहा, वहीं सेवानिवृत्त नौकरशाह ने इसकी तीखी आलोचना की। दास के पास असम में श्रम और चाय बागान कल्याण विभागों का प्रभार है। उन्होंने दावा किया कि भानु राज्य के लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करते क्योंकि वह आंध्र प्रदेश से आते हैं।

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दास ने कहा कि संसद में असम का प्रतिनिधित्व करने वाले उम्मीदवार को निश्चित रूप से राज्य के लोगों की भावनाओं, कल्याण और आकांक्षाओं के लिये खड़ा होना चाहिए। वह (भानु) बाहरी हैं, आंध्र प्रदेश से आये एक ‘सलानी मास’। भाजपा उम्मीदवार की इस टिप्पणी के जवाब में भानु ने दलील दी कि वर्ष 1985 से वह राज्य की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने जवाबी हमला करते हुए कहा कि मंत्री (दास) युवा हैं। मुझे लगता है कि जब मैं आईएएस अधिकारी बना और राज्य की सेवा के लिये आया तथा यहां विभिन्न पदों पर रहा, उस वक्त उनका जन्म भी नहीं हुआ होगा। उनके बयानों के लिये मैं उन्हें माफ करता हूं क्योंकि उन्हें मेरे काम और योगदान के बारे में पता नहीं है।

पूर्व नौकरशाह आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले में नवाबुपालेम से आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें चुनाव लड़ने को लेकर अपनी योग्यता साबित करने के लिये दास से कोई प्रमाणपत्र नहीं चाहिए। महापुरूष श्रीमंत शंकरदेव की कृति ‘गुणमाला’ से एक पद का उल्लेख करते हुए पूर्व नौकरशाह ने कहा कि चार तरह के लोग होते हैं- अधम, मध्यम, उत्तम और उत्तम-उत्तम। अधम बिना कारण लोगों की आलोचना करते हैं, मध्यम लोग तार्किक तरीके से सोचते हैं, उत्तम लोग किसी व्यक्ति में अच्छे गुणों को देखते हैं और उत्तम-उत्तम लोग किसी व्यक्ति की छोटी से छोटी अच्छाई की भी तारीफ करते हैं।

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उन्होंने कहा कि पल्लब कौन हैं जो यह फैसला करेंगे कि मैं चुनाव लड़ने के काबिल हूं या नहीं। मुझे उनके सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। राज्य के लोग अपनी भलाई के लिये फैसला करेंगे। भानु पर पलटवार करते हुए दास ने बाद में पत्रकारों से कहा कि सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ने उनके मातहत सेवा की है और इसलिए वह उनके योगदानों से अवगत हैं। उन्होंने कहा कि जिस वक्त वह असम में आईएएस अधिकारी के तौर पर सेवा दे रहे थे संभवत: तब मेरा जन्म नहीं हुआ होगा, लेकिन बतौर अतिरिक्त मुख्य सचिव अपनी सेवानिवृत्ति तक भानु मेरे मातहत काम कर चुके हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वह मुझे ‘सर’ कहकर संबोधित करते थे।

इस जुबानी जंग में कूदते हुए असम के वित्त मंत्री और नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस के संयोजक हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि भानु को ‘गुणमाला’ याद है लेकिन इन सबको राजनीति से दूर रखना चाहिए।


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