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लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक को दी मंजूरी

By LSChunav | Publish Date: Aug 5 2019 8:56PM
लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक को दी मंजूरी

निचले सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार की भूमिका न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप नहीं करने की है, बल्कि सहयोग करने की है।

नयी दिल्ली। लोकसभा ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक 2019 को मंजूरी दे दी जिसमें उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 करने का प्रावधान किया गया है। निचले सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार की भूमिका न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप नहीं करने की है, बल्कि सहयोग करने की है। उन्होंने कहा कि 2016 में उच्च न्यायालय में 126 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई, 2017 में 115 तथा 2018 में 108 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई और इस साल अब तक 31 न्यायाधीशों की नियुक्ति कर चुके हैं।

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) विधेयक पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए प्रसाद ने कहा कि फैसले में यह कहना उचित नहीं है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में भारत की संसद का कोई प्रतिनिधि नहीं होगा। मंत्री ने कहा कि न्यायाधीशों को विचार करना चाहिए कि उनकी जवाबदेही क्या है। प्रसाद ने कहा कि न्यायिक नियुक्ति में स्क्रीनिंग होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश अपेक्षा करता है कि न्यायपालिका में वंचित तबकों को मौका मिलना चाहिए। प्रसाद ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) पर सर्वसम्मति होनी चाहिए, लेकिन इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति फैसले में जो टिप्पणी करना है कर लें, लेकिन वो सरसरी तौर पर टिप्पणी (स्वीपिंग कमेंट) कर देते हैं वो नहीं होना चाहिए।

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मंत्री के जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इससे पहले विधेयक पेश करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि देश में अखिल भारतीय न्यायिक सेवा होनी चाहिए। आईएएस और आईपीएस की तर्ज पर इसकी परीक्षा होनी चाहिए। इससे सभी वंचित तबकों को न्यायपालिका में जगह मिलेगी। प्रसाद ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार में न्यायपालिका में रिक्तियों को भरने के पूरे प्रयास किए गए हैं। उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की संख्या 906 से बढ़कर 1079 हो गई है। उल्लेखनीय है कि अभी शीर्ष न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) समेत 31 न्यायाधीश हैं। उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) कानून, 1956 आखिरी बार 2009 में संशोधित किया गया था, जब सीजेआई के अलावा न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 की गई थी। 

भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया था। भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि न्यायाधीशों की कमी के कारण कानून के सवालों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में फैसला लेने के लिए आवश्यक संवैधानिक पीठों का गठन नहीं किया जा रहा। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि भारत के उच्चतम न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। 1 जून 2019 तक उच्चतम न्यायालय में 58,669 मामले लंबित थे। भारत के प्रधान न्यायाधीश ने सूचित किया है कि न्यायाधीशों की अपर्याप्त संख्या शीर्ष अदालत में मामलों के लंबित होने के मुख्य कारणों में से एक कारण है। 

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इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायमूर्तियों तथा न्यायाधीशों की पोषक काडर संख्या 906 से बढ़कर 1079 हो गई है। इसके कारण उच्च न्यायालय स्तर पर मामलों के निपटान में वृद्धि हुई है जिसका कारण उच्चतम न्यायालय में अधिक संख्या में अपीलें किया जाना है। ऐसे में उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को वर्तमान में भारत के प्रधान न्यायमूर्ति को छोड़कर 30 से बढ़ाकर 33 करने के लिये उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) कानून, 1956 का और संशोधन करने का प्रस्ताव है। 


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