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उद्धव ठाकरे ने भीमा-कोरेगांव मामले की जांच NIA को सौंपी तो खफा हुए शरद पवार

By अनुराग गुप्ता | LSChunav | Publish Date: 2/15/2020 3:31:21 PM
उद्धव ठाकरे ने भीमा-कोरेगांव मामले की जांच NIA को सौंपी तो खफा हुए शरद पवार

महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में अब खटास बढ़ती जा रही है। पिछले कुछ दिनों से शिवसेना और कांग्रेस के बीच तनातनी की खबरें थीं लेकिन अब इसमें तीसरी पार्टी भी शामिल हो गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा भीमा कोरेगांव मामले की जांच एनआईए को सौंपे जाने से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार बेहद नाराज हुए हैं।

मुबंई। महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में अब खटास बढ़ती जा रही है। पिछले कुछ दिनों से शिवसेना और कांग्रेस के बीच तनातनी की खबरें थीं लेकिन अब इसमें तीसरी पार्टी भी शामिल हो गई है। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे  द्वारा भीमा कोरेगांव मामले की जांच एनआईए को सौंपे जाने से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार बेहद नाराज हुए हैं। जिसको लेकर उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।

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इस मामले की जांच अब एनआईए को सौंप दी गई है। जिसके बाद शरद पवार ने कहा कि कानून व्यवस्था का मामला राज्य का है और राज्य सरकार को ऐसे केंद्र के फैसले का समर्थन नहीं करना चाहिए। आपको बता दें कि पिछले महीने महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने भीमा कोरेगांव मामले को एनआईए को सौंपे जाने का विरोध किया था लेकिन अब वह केंद्र के फैसले का समर्थन कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शरद पवार ने दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार इस मामले में एक्शन लेने वाली थी इसीलिए केंद्र ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने यह भी कहा कि सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर हुई कि प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध नहीं किया।

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कब का है यह मामला

दरअसल, 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में एलगार परिषद सम्मेलन आयोजित किया गया था। पुणे पुलिस का दावा है कि इस आयोजन की वजह से अगले दिन जिले में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की थी। पुलिस ने यह भी दावा किया है कि इस सम्मेलन को माओवादियों का समर्थन प्राप्त है। ऐसा कहा गया था कि एलगार परिषद सम्मेलन में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए गए थे।

NCP ने की थी मामले की निंदा

कोरेगांव भीमा हिंसा मामले की जांच एनआईए को सौंपने के केंद्र के फैसले की एनसीपी ने निंदा की थी। साथ ही आरोप लगाया था कि केंद्र के इस कदम का मकसद महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार के गलत कारनामों पर पर्दा डालना है।


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