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150वीं जयंती पर UN में बोले मोदी, जिनसे गांधी जी कभी मिले नहीं वो भी उनके मुरीद थे

By LSChunav | Publish Date: Sep 25 2019 9:11AM
150वीं जयंती पर UN में बोले मोदी, जिनसे गांधी जी कभी मिले नहीं वो भी उनके मुरीद थे

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि समकालीन युग में महात्मा गांधी की प्रासंगिकता विषय पर बोलते हुए मोदी ने कहा कि गांधी जी भारतीय थे, लेकिन सिर्फ भारत के नहीं थे। आज यह मंच इसका जीवंत उदाहरण है।

न्यूयॉर्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर संयुक्त राष्ट्र में अपने विचार रखते हुए बुधवार को कहा कि गांधी भारतीय थे, लेकिन वह केवल भारत के नहीं थे और यह मंच इसका जीवंत उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी ने यहां भारत द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में महात्मा गांधी पर अपने विचार साझा किए। मोदी समेत विश्व के नेताओं ने यहां संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में गांधी सौर पार्क का भी उद्घाटन किया और गांधी की 150वीं जयंती पर संयुक्त राष्ट्र ने उनकी याद में एक डाक टिकट भी जारी किया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट करके बताया कि ‘समकालीन युग में महात्मा गांधी की प्रासंगिकता’ विषय पर बोलते हुए मोदी ने कहा कि गांधी जी भारतीय थे, लेकिन सिर्फ भारत के नहीं थे। आज यह मंच इसका जीवंत उदाहरण है।

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मोदी ने कहा कि आप कल्पना कर सकते हैं कि जिनसे गांधी जी कभी मिले नहीं, वे भी उनके जीवन से कितना प्रभावित रहे। मार्टिन लूथर किंग जूनियर हों या नेल्सन मंडेला, उनके विचारों का आधार महात्मा गांधी थे, गांधी जी की सोच थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज लोकतंत्र की परिभाषा का एक सीमित अर्थ रह गया है कि जनता अपनी पसंद की सरकार चुने और सरकार जनता की अपेक्षा के अनुसार काम करे, लेकिन महात्मा गांधी ने लोकतंत्र की असली शक्ति पर बल दिया। उन्होंने वह दिशा दिखाई जिसमें लोग शासन पर निर्भर न हों और स्वावलंबी बनें। उन्होंने कहा, ‘महात्मा गांधी ने एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था का बीड़ा उठाया, जो सरकार पर निर्भर न हो। यह सर्वविदित है कि महात्मा गांधी परिवर्तन लाए, लेकिन यह कहना भी उचित होगा कि उन्होंने लोगों की आंतरिक शक्ति को जगा कर उन्हें स्वयं परिवर्तन लाने के लिए जागृत किया।’

उन्होंने कहा कि अगर आजादी के संघर्ष की जिम्मेदारी गांधी जी पर न होती, तो भी वह स्वराज और स्वावलंबन के मूल तत्व को लेकर आगे बढ़ते। गांधी जी की यह सोच आज भारत के सामने बड़ी चुनौतियों के समाधान का बड़ा माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते पांच वर्षों में हमने जनभागीदारी को प्राथमिकता दी है। चाहे स्वच्छ भारत अभियान हो या डिजिटल इंडिया हो, जनता अब इन अभियानों का नेतृत्व खुद कर रही है। मोदी ने कहा कि गांधी ने कभी अपने जीवन से प्रभाव पैदा करने का प्रयास नहीं किया लेकिन उनका जीवन ही प्रेरणा का कारण बन गया। उन्होंने कहा कि आज हम ‘कैसे प्रभावित किया जाए’ के दौर में जी रहे हैं लेकिन गांधी जी की सोच थी- ‘कैसे प्रेरित किया जाए’।

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मोदी ने कहा कि चाहे जलवायु परिवर्तन हो, आतंकवाद, भ्रष्टाचार हो या फिर स्वार्थपरक सामाजिक जीवन हो, गांधी जी के ये सिद्धांत, हमें मानवता की रक्षा करने के लिए मार्गदर्शक की तरह काम करते हैं। मुझे विश्वास है कि गांधी जी का दिखाया यह रास्ता बेहतर विश्व के निर्माण में प्रेरक सिद्ध होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं समझता हूं कि जब तक मानवता के साथ गांधी जी के विचारों का यह प्रवाह बना रहेगा, तब तक गांधी जी की प्रेरणा और प्रासंगिकता भी हमारे बीच बनी रहेगी। इस समारोह में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, भूटान के प्रधानमंत्री लोते शेरिंग, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेइ इन, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लुंग, जमैका के प्रधानमंत्री एंड्रयू माइकल होलनेस और न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न समेत कई राष्ट्र प्रमुखों ने हिस्सा लिया।


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