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स्कूली बच्चों की थालियों में भी बंटवारे की नौबत आई, किस ओर जा रहा है बंगाल?

By अभिनय आकाश | LSChunav | Publish Date: Jun 29 2019 6:06PM
स्कूली बच्चों की थालियों में भी बंटवारे की नौबत आई, किस ओर जा रहा है बंगाल?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बंगाल की सवा नौ करोड़ की कुल आबादी में से लगभग ढाई करोड़ यानि 27 फीसद मुस्लिम वोट बैंक की खेती में लगातार लगी हुई हैं। सूबे में विधानसभा चुनाव 2021 में होने हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप से घिर गई हैं। पश्चिम बंगाल की सरकार पर मिड डे मिल के लिए बच्चों में बंटवारा करने का आरोप लग रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 70 प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक छात्रों वाले सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए भोजन कक्षों के निर्माण का निर्देश देने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस पर राज्य में सांप्रदायिक विभाजन करने का आरोप लगाया। हालांकि तृणमूल के वरिष्ठ नेता और अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री ग्यासुद्दीन मुल्ला ने आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और यह कहते हुये इस फैसले का बचाव किया कि इससे सभी छात्रों को फायदा होगा। भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने तो टीएमसी को टोटल मुस्लिम कांग्रेस करार दे दिया। 

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खुद को धर्मनिरपेक्षता का सबसे बड़ा रक्षक मानने वाली ममता वर्तमान में धार्मिक बंटवारे के आरोपों से घिर गई हैं। ऐसा नहीं है कि ममता बनर्जी पर पहली बार मुस्लिम तृष्टिकरण के आरोप लगे हैं। इससे पहले इसी वर्ष ममता की ईदी खासा चर्चा में रही थी, जब बंगाल सरकार ने अल्पसंख्यक सरकारी कर्मचारियों को 4,000 रुपए बोनस देने का फैसला किया था। थोड़ा और पहले जाएं तो साल 2017 में 23 अगस्त को ममता बनर्जी ने एक सरकारी आदेश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि 1 अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन 24 घंटे के लिए रोक दिया जाएगा। इस आदेश में कहा गया कि मूर्तियों का विसर्जन विजयदशमी के दिन यानि 30 सितंबर को रात 10 बजे के बाद नहीं होगा क्योंकि 1 अक्टूबर को मुहर्रम है, इसलिए मूर्तियों का विसर्जन नहीं होगा और फिर 2 से 4 अक्टूबर तक मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। जिसे बाद में हाई कोर्ट में चुनौती मिली और ममता सरकार को मुंह की खानी पड़ी। 
साल 2016 में भी ममता दीदी ने कुछ इस तरह के ही तुष्टिकरण का प्रयास करते हुए मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाई थी जिसे हाई कोर्ट ने बदल दिया था। ममता बनर्जी राज्य की सत्ता संभालते ही मुस्लिम तुष्टीकरण में जुट गई थीं और 2011 में ममता बनर्जी ने मस्जिदों के ईमाम और मोअज्जिन को 2500 रुपए व 3500 रुपए प्रतिमाह भत्ता देने की घोषणा की थी। हालांकि, सरकार के इस फैसले को कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया। 
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बंगाल की सवा नौ करोड़ की कुल आबादी में से लगभग ढाई करोड़ यानि 27 फीसद मुस्लिम वोट बैंक की खेती में लगातार लगी हुई हैं। सूबे में विधानसभा चुनाव 2021 में होने हैं। सत्ता कायम रखने के लिए आंकड़ों के जोड़-तोड़ व सियासी गुणा-भाग में ममता पूरी तरह से जुटी हैं। बंगाल के आंकड़ों का खेल भी दिलचस्प है। राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 140 सीटों पर मुस्लिम वोटर निर्णायक साबित होते हैं। अगर 2016 के विधानसभा चुनाव में ममता दीदी की जीत पर नज़र डालें तो इसमें मुस्लिम वोटरों की भूमिका 51 फीसद रही थी। वहीं 2011 के विस चुनाव में भी ममता बनर्जी ने 35 फीसद मुस्लिम वोट प्राप्त कर ही 33 साल के वामपंथी युग का अंत किया था।
वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में ममता दीदी के 211 विधायकों में से 32 मुस्लिम विधायक शामिल रहे। अब ऐसे में तुष्टिकरण की इस राजनीति के बीच भारतीय जनता पार्टी हिंदुओं के अधिकारों के हनन का मुद्दा उठाकर राज्य में खुद को प्रमुख विपक्षी दावेदार के रूप में पेश कर रही हैं। 2 लोकसभा सीटों से 18 सीटों पर पहुंची भाजपा के लिए बंगाल जमीन बचाने और बनाने का प्रदेश हो गया है। भाजपा के इस प्रयास को ममता दीदी के किये गए फैसलों से लगातार बल भी मिल रहा है। 


तीखे बयान