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आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से लोकसभा अध्यक्ष ने विश्व को किया आगाह

By LSChunav | Publish Date: 11/4/2019 3:46:23 PM
आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से लोकसभा अध्यक्ष ने विश्व को किया आगाह

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि ऊर्जा के उपयोग में कुशलता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए, नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ानी होगी।

नई दिल्ली। जापान में जी-20 देशों की संसदों के अध्यक्षों का शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आज विश्व विभिन्न चुनौतियों से जूझ रहा है जो कि न केवल विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रोकती हैं, बल्कि मानवता के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है। बिरला ने कहा कि सबसे पहली और प्रमुख चुनौती आतंकवाद है । आतंकवाद न केवल समाज को नुकसान पहुंचाता है बल्कि इससे अर्थव्यवस्था को भी गंभीर नुकसान होती है  और यह मौजूदा विकास को नष्ट कर देता है।

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उन्होंने आगे कहा कि दूसरी प्रमुख चुनौती जलवायु परिवर्तन की है यह न केवल हमारे ग्रह का स्वरूप बदल रही है बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए गंभीर जोखिमों तथा अस्थिरता का भी सृजन कर रही है। ओम बिरला ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर समान और साझी किन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए एक समग्र तरीके से विचार किए जाने की आवश्यकता है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि ऊर्जा के उपयोग में कुशलता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए, नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। हमें सस्ती तकनीक के विकास के लिए निवेश करना होगा। उन्होंने कहा कि विकास एजेंडे के लक्ष्य को प्राप्त करने की गति को बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने 'स्ट्रेटेजी फॉर न्यू इंडिया 75' योजना आरंभ की है जोकि सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है और जिसका उद्देश्य 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है।

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ओम बिरला ने कहा कि आयुष्मान भारत, विश्व में किसी सरकार की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है, जिसके अंतर्गत 500 मिलियन भारतीयों को 7100 अमरीकी डॉलर का वार्षिक चिकित्सा कवर प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जी-20 देशों का सकल घरेलु उत्पाद विश्व के कुल सकल घरेलु उत्पाद का 80 प्रतिशत और विश्व व्यापार 75 प्रतिशत से अधिक है। लोकसभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि हमारी प्रतिबद्धता और सामूहिक प्रयास न केवल पूरे विश्व के लोगों के जीवन और उनकी आजीविका में आमूलचूल परिवर्तन लाने में बल्कि 2030 तक 2030 एजेंडे के लक्ष्यों को समय से प्राप्त करने में है।


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