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वित्तमंत्री सुधीर मुंगटीवार ने पेश किया बजट, बढ़ेगा राजस्व घाटा

By LSChunav | Publish Date: Jun 18 2019 8:05PM
वित्तमंत्री सुधीर मुंगटीवार ने पेश किया बजट, बढ़ेगा राजस्व घाटा

विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुधीर मुंगटीवार ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में सरकार का राजस्व व्यय 3,34,933.06 करोड़ रुपये और राजस्व प्राप्ति 3,14,640.12 करोड़ रुपये रहने की संभावना है।

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को 2019-20 का बजट पेश किया जिसमें कृषि, सिंचाई और ढांचागत क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिये आवंटन बढ़ाया गया है। आवंटनों को बढ़ाए जाने से राजस्व घाटा बढ़कर 20,292.94 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। पिछले साल राजस्व घाटा14,960.04 करोड़ रुपये था। विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुधीर मुंगटीवार ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में सरकार का राजस्व व्यय 3,34,933.06 करोड़ रुपये और राजस्व प्राप्ति 3,14,640.12 करोड़ रुपये रहने की संभावना है। यह बजट राज्य विधानसभा चुनाव से ठीक तीन महीने पहले पेश किया गया है। इसमें कृषि, सिंचाई और बुनियादी ढांचा के साथ महिलाओं, पिछड़े और अन्य पिछड़े वर्ग एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के कल्याण पर जोर दिया गया है।

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इसमें सिंचाई के लिये 12,000 करोड़ रुपये, सूक्ष्म सिंचाई के लिये 350 करोड़ रुपये, धांगड़ समुदाय के विकास के लिये 1,000 करोड़ रुपये, ओबीसी निगमों के लिये 200 करोड़ रुपये और चार कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा शोध के लिये 600 करोड़ रुपये के प्रस्ताव किये गये हैं। इसके अलावा दिव्यांगों के लिये मकानों के निर्माण को लेकर 100 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। बजट में जल संसाधन विभाग के लिये 12,597 करोड़ रुपये और 600 करोड़ रुपये चार कृषि विश्विद्यालय स्थापित करने के लिये आबंटित किये गये हैं। इसमें दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजयेपी की याद में स्मारक बनाने का प्रस्ताव किया गया है।

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विधानसभा और विधान परिषद में विपक्षी सदस्यों ने बजट पेश करने से पहले उसके प्रस्तावों के वित्त मंत्री मुंगटीवार के टि्वटर हैंडल पर ‘लीक’ होने के विरोध में बहिर्गमन किया। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने इस आरोप को गलत बताया और कहा कि मंत्री के बजट भाषण के 15 मिनट बाद प्रस्ताव ट्विटर पर आये। मुंगटीवार ने कहा कि इस साल मार्च अंत में राज्य के ऊपर कुल कर्ज 4,14,411 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था के आकार को देखते हुए कर्ज बोझ स्वीकार्य सीमा के भीतर है।


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