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लेफ्ट यूनिटी का फिर लहराया झंडा, JNU में गूंज रहा ''लाल सलाम'' का नारा

By अनुराग गुप्ता | LSChunav | Publish Date: Sep 18 2019 12:52PM
लेफ्ट यूनिटी का फिर लहराया झंडा, JNU में गूंज रहा ''लाल सलाम'' का नारा

आइशी घोष को कुल 2313 वोट मिले। जबकि एबीवीपी उम्मीदवार मनीष जांगिड़ को 1128 वोट मिले अगर हम एबीवीपी की बात करें तो सभी चारों पदों पर एबीवीपी को दूसरा स्थान मिला है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2019 के नतीजे घोषित हो चुके हैं और इसी के साथ एक बार फिर से जेएनयू में लेफ्ट का बोलबाला रहा। सभी चारों पदों पर वामपंथी छात्र संगठनों एआईएसए, एसएफआई, एआईएसएफ और डीएसएफ के संयुक्त मोर्चे के उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर लाल झंड़ा फहराया। बता दें कि जेएनयूएसयू के अध्यक्ष पद पर आइशी घोष निर्वाचित हुईं हैं। 

आइशी घोष को कुल 2313 वोट मिले। जबकि एबीवीपी उम्मीदवार मनीष जांगिड़ को 1128 वोट मिले अगर हम एबीवीपी की बात करें तो सभी चारों पदों पर एबीवीपी को दूसरा स्थान मिला है। इसके अतिरिक्त अध्यक्ष पद के लिए खड़े हुए बाप्सा के उम्मीदवार जितेंद्र सुना 1121 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

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विगत वर्षों से बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बाप्सा) का मानना रहा है कि उनका वोट प्रतिशत हर साल बढ़ रहा है लेकिन क्या वोट प्रतिशत बढ़ने से लेफ्ट दलों पर कोई असर पड़ा है तो जवाब आपके सामने है। सभी चारों पदों पर लाल सलाम का नारा गूंजा है। 

क्या आप अभी भी यह सोच रहे हैं कि बाप्सा का यह कहना सही है तो आप सही सोच रहे हैं क्योंकि अभी तो पूरा साल बाकी है और आने वाले समय में उन्हें एक बार फिर से चुनाल लड़ना है और अपनी जमीन को मजबूत करना है इसके लिए आपसी विश्वास की जरूरत है तो बाप्सा ने खुद ही अपना हौसला बढ़ाया और आगे वाले समय की चुनौतियां के लिए खुद को प्रोत्साहित किया। 

वो कहते हैं कि जीत की राह में चला व्यक्ति हारता है, फिर हारता है और समय पलटते ही जीत की मंजिल तक पहुंच ही जाता है। अब अगले वर्ष यानी की 2020-21 में जीत का झंडा लेफ्ट लहराएगा या एबीवीपी या फिर बाप्सा यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा लेकिन अभी बात इस चुनाक की करते हैं।

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जेएनयूएसयू का उपाध्यक्ष के तौर पर साकेत मून पर जेएनयू के विद्यार्थियों ने भरोसा जताया है। उन्होंने 3365 वोट हासिल करके एबीवीपी की श्रुति अग्निहोत्री को मात ही जिन्हें 1335 वोट मिले थे। जबकि सीआरजेडी के ऋषिराज यादव को महज 285 वोट ही मिल सके। हालांकि विद्यार्थियों ने ऋषिराज यादव से कहीं ज्यादा नोटा का बटन दबाना उचित समझा तभी तो नोटा को 558 लोगों ने दबाया था।

महासचिव पद के लिए जरूर एबीवीपी की मेहनत काम लाई लेकिन हारे तो हैं ही। औरे से अच्छा प्रदर्शन दिखाते हुए एबीवीपी के सबरीश पीए लेफ्ट के सतीश यादव से आधे के अंतर से हारे हैं। सतीश को कुल 2518 तो सबरीश पीए को 1355 वोट मिले हैं।

अब बात चौथे और आखिरी पद की यानी की संयुक्त सचिव की। वामदल के मोहम्मद दानिश को 3295 वोट मिले और एबीवीपी के सुमंत साहू को 1508। 

अब आप सोच रहे होंगे कि चुनाव के नतीजे घोषित होने में इतना समय कैसे लग गया तो आपको बता देते हैं कि जेएनयू के दो विद्यार्थियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि चुनाव समिति ने लिंग्दोह कमेटी की सिफारिशों की अनदेखी करके छात्रसंघ का चुनाव कराया है। इन आरोपों पर विचार करते हुए कोर्ट ने जेएनयू प्रशासन इलेक्शन कमेटी और मामले से जुड़े सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे। 

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अब कोर्ट को जवाब मिल चुका था और पूरा मामला भी समझ में आ गया। जिसके बाद हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और फोन के जरिए जेएनयू प्रशासन इलेक्शन कमेटी को चुनाव परिणाम घोषित करने के लिए कहा। बाकी कहानी आपके सामने है। लेकिन अभी भी आप सब असमंजस में होंगे कि जेएनयू प्रशासन ने कोर्ट से कहा क्या था।

दरअसल जेएनयू प्रशासन ने कोर्ट से कहा कि उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए या तो अनुपयुक्त पाया गया था या फिर पीछे उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को उन्होंने छिपाया था। जेएनयू ने अपनी दलील कोर्ट के सामने रखी तो कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगा दी और कहा कि हमने आपकी जानकारी के बाद चुनाव परिणामों पर रोक लगा दी थी लेकिन आपके द्वारा दी गई जानकारी सही नहीं थी।

साल 2016 के बाद लेफ्ट संगठनों ने बनाई थी लेफ्ट यूनिटी

जेएनयू में छात्र संघ चुनाव में लेफ्ट का अपना ही इतिहास रहा है लेकिन साल 2016 में कथित तौर पर देशविरोधी नारों के प्रकरण के बाद लेफ्ट संगठनों ने मिलकर लेफ्ट यूनिटी बनाई थी। जो साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और एकतरफ छात्र संघ चुनाव में जीत हासिल करते आए हैं। इस बार भी वामपंथी छात्र संगठनों एआईएसए, एसएफआई, एआईएसएफ और डीएसएफ ने मिलकर चुनाव लड़ा और नतीजे आपके सामने है। 


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