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चुनाव आयोग प्रभावी भूमिका निभाने में रहा नाकाम: भाकपा

By LSChunav | Publish Date: May 16 2019 6:28PM
चुनाव आयोग प्रभावी भूमिका निभाने में रहा नाकाम: भाकपा

ने कहा, ‘‘इस चुनाव में आयोग द्वारा तटस्थ रूप से काम नहीं कर पाने और मोदी तथा शाह को लाभ पहुंचाते दिखने के कारण आयोग की विश्वसनीयता भी प्रभावित हुयी है। अब समय आ गया है जबकि संसद चुनाव आयुक्तों के चयन और नियुक्ति की उपयुक्त प्रक्रिया स्थापित की जाये।’’

नयी दिल्ली। भाकपा ने लोकसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग पर सत्तापक्ष को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुये कहा है कि संवैधानिक संस्था के रुप में आयोग, प्रभावी भूमिका निभाने में नाकाम रहा है और इसके मद्देनजर अब माकूल समय आ गया है जबकि संसद, चुनाव आयुक्तों के चयन और नियुक्ति की उपयुक्त प्रक्रिया को निर्धारित करे। भाकपा ने कोलकाता की चुनावी हिंसा में समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किये जाने की घटना को निंदनीय बताते हुये 17वीं लोकसभा के चुनाव में इस तरह की अराजकतापूर्ण स्थिति पनपने के लिये आयोग की निष्प्रभावी भूमिका को जिम्मेदार ठहराया है। 

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पार्टी द्वारा बृहस्तिवार को जारी बयान में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में हुयी चुनावी हिंसा की निंदा करते हुये कहा कि इस दौरान विद्यासागर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किये जाने की घटना के लिये भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) जिम्मेदार हैं। पार्टी ने कहा कि भाजपा और टीएमसी इस स्थिति के लिये एकदूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, दोनों दलों के आरोप प्रत्यारोप के बीच पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक हो गयी है।

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उल्लेखनीय है कि मंगलवार को कोलकाता में शाह के रोड शो के दौरान भाजपा और टीएमसी के कार्यकर्ताओं के बीच हुयी हिंसक झड़प के दौरान विद्यासागर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त कर दी गई थी। भाकपा ने विद्यासागर की प्रतिमा स्थापित करने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा पर क्षोभ व्यक्त करते हुये कहा, ‘‘यह विडंबना ही है कि प्रधानमंत्री ने इस घटना पर माफी मांगने के बजाय बाद में नयी और भव्य प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की।’’ भाकपा ने कहा कि इस मामले में स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के तौर पर चुनाव आयोग उत्तरदायी भूमिका के निर्वाह में विफल साबित हुआ है। 

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पार्टी ने कहा, ‘‘इस चुनाव में आयोग द्वारा तटस्थ रूप से काम नहीं कर पाने और मोदी तथा शाह को लाभ पहुंचाते दिखने के कारण आयोग की विश्वसनीयता भी प्रभावित हुयी है। अब समय आ गया है जबकि संसद चुनाव आयुक्तों के चयन और नियुक्ति की उपयुक्त प्रक्रिया स्थापित की जाये।’’


तीखे बयान