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क्राइम रिपोर्टर थे संजय राउत, दफ्तर आकर दाऊद देता था खबरें, विश्वास करेंगे आप ?

By अनुराग गुप्ता | LSChunav | Publish Date: 11/11/2019 11:48:17 AM
क्राइम रिपोर्टर थे संजय राउत, दफ्तर आकर दाऊद देता था खबरें, विश्वास करेंगे आप ?

संजय राउत को तो खुद बाला साहेब ठाकरे ने मुखपत्र सामना का कार्यकारी संपादक बनाया था। आंबेडकर कालेज से बीटेक की पढ़ाई करने वाले राउत विद्यार्थी जीवनकाल से ही शिवसेना की स्टूडेंट यूनिट में सक्रिय थे।

शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत सियासी उठापटक के बीच सुर्खियों में बने हुए हैं और वह भाजपा को घेरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। इन दिनों वह कविताएं और फिल्मी डायलॉग को ट्विटर पर शेयर करते हुए महाराष्ट्र के मौजूदा हालात से लोगों को रूबरू करा रहे हैं। ये वही संजय राउत हैं जो ठाकरे परिवार के सबसे खास और विश्‍वासपात्र व्‍यक्ति रहे हैं।

राउत को तो खुद बाला साहेब ठाकरे ने मुखपत्र सामना का कार्यकारी संपादक बनाया था। आंबेडकर कालेज से बीटेक की पढ़ाई करने वाले राउत विद्यार्थी जीवनकाल से ही शिवसेना की स्टूडेंट यूनिट में सक्रिय थे। धीरे-धीरे समय गुजरता गया और छात्र राजनीति में आने वाले राउत ने छात्रसंघ का चुनाव भी जीता।

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बाला साहेब ठाकरे के कार्टून वीकली 'मार्मिक' के जरिए संजय राउत को अपने कलम की ताकत को दिखाने का अवसर मिला था। इतना ही नहीं बाला साहेब ठाकरे व्यक्तिगत तौर पर संजय राउत की लेखनी से काफी प्रभावित भी थे। ठाकरे साहब के कहने के बाद ही राउत ने लोकसत्ता अखबार के लिए काम करना शुरू किया लेकिन लोकसत्ता में राउत ज्यादा दिन नहीं रहे, उन्हें यहां पर ज्यादा काम करने का मौका नहीं मिला। इसीलिए राउत ने मराठी पत्रिका लोकप्रभा को ज्वाइन कर लिया था।

लोकप्रभा से क्राइम रिपोर्टिंग की शुरुआत करने वाले राउत ने काफी लोकप्रियता हासिल की। 80 के दशक में अखबारों की सुर्खियों में अंडरवर्ल्ड की खबरें छाई रहती थी और गैंगवार तो खबरें तो रोजाना ही सुनाई दे देती थी। यह वो दौर था जब दाऊद इब्राहिम का नाम सुनाई देना शुरू हुआ था। उस वक्त दाऊद वांटेड क्रिमिनल नहीं था। 

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क्राइम रिपोर्टिंग करने वाले संजय राउत की खबरों के सूत्रधार हुआ करता था दाऊद। इतना ही नहीं दाऊद इब्राहिम तो खुद कई बार संजय राउत को खबरें देने के लिए एक्सप्रेस टॉवर आया करता था। दोनों वहां की कैंटीन में बैठकर बातचीत किया करते थे। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक क्राइम रिपोर्टिंग के जरिए नाम कमाने वाले संजय राउत कभी भी रिपोर्टर होते हुए पुलिस चौकी नहीं पहुंचे और न ही कभी किसी खबर को लेकर पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। क्राइम रिपोर्टिंग के साथ ही संजय राउत ने राजनीतिक खबरों को भी पकड़ा और उनकी रिपोर्टिंग करने लगे। 

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मराठियों की बात करने वाली शिवसेना को मराठियों से लेकर हिन्दुओं की पार्टी बनाने में भी संजय राउत ने बड़ी भूमिका निभाई थी। उनके सुझाव के बाद ही शिवसेना के मुखपत्र सामना को मराठी के साथ ही हिंदी भाषा में भी शुरू किया गया। बाला साहेब के दिल में अपनी जगह बनाने वाले संजय राउत उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी माने जाते हैं। तभी तो साल 2004 में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया और सांसद बना दिया। संजय राउत के कद को इसी से माप सकते हैं कि वह राज्यसभा में शिवसेना के संसदीय दल के नेता हैं। 

मीडिया और शिवसेना के बीच की कड़ी संजय राउत को ही माना जाता है क्योंकि वहीं अक्सर पार्टी का पक्ष रखते हुए दिखाई देते हैं। हालांकि अपने वक्तव्य के समय वह यह जरूर स्पष्ट कर देते हैं कि अंतिम फैसला तो पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे का ही होगा, चाहे मुद्दा कोई भी हो।


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