जम्मू कश्मीर में किसकी होगी जीत- एक तरफ चुनाव विरोधी दुष्प्रचार, दूसरी तरफ मतदाता

LSChunav     Apr 25, 2019
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जम्मू कश्मीर में किसकी होगी जीत- एक तरफ चुनाव विरोधी दुष्प्रचार, दूसरी तरफ मतदाता

अनंतनाग में गत रोज सिर्फ 13.63 प्रतिशत मतदान हुआ है। हालांकि, वर्ष 2014 में संसदीय चुनाव के दौरान जिला अनंतनाग में ही करीब 40 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि पूरे क्षेत्र मे मतदान 29 प्रतिशत रहा था।

जम्मू। कश्मीर के अनंतनाग संसदीय क्षेत्र में उम्मीदवारों ने भी अपना रुख कुलगाम, पुलवामा व शोपियां की तरफ कर लिया है। जबकि चुनाव विरोधी दुष्प्रचार में जुटी ताकतें पहले ही सभी संसदीय क्षेत्रों में अपना दम दिखा रही हैं। दक्षिण कश्मीर के चार जिलों में फैले अनंतनाग-पुलवामा संसदीय क्षेत्र में 18 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। सभी का प्रयास है कि अन्य दो चरणों के मतदान में वह अपने अपने प्रभाव वाले इलाकों में ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचा कर अपनी जीत को यकीनी बनाएं। अनंतनाग संसदीय क्षेत्र में पड़ते कुलगाम जिले में 29 अप्रैल और पुलवामा व शोपियां में छह मई को मतदान होना है।

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वहीं, निर्दलीय चुनाव लड़ रही डॉ. रिदवाना सनम भी जिला कुलगाम के करीब एक दर्जन गांवों में प्रचार करती नजर आई। भाजपा प्रत्याशी सोफी युसुफ भी काजीगुंड और उसके साथ लगते इलाकों में अपने साथियों संग भाजपा समर्थकों की बैठकों में शामिल हुए।निर्दलीय रिदवाना सनम ने कुलगाम में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए धारा 370 और 35 ए का जिक्र करने के बजाय लोगों से जुड़े विकास के मुददे उठाए। उन्होंने जनसभाओं को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में वही शख्स जाए जो कश्मीरियों के दिल की बात करे। दैनिक जागरण के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि मेरा मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को मतदान के लिए प्रोत्साहित करना है। हार-जीत की बात बाद की है। मैं लोगों से कह रही हूं कि वह नारों पर न जाएं, कश्मीर की बेहतरी को ध्यान में रखते हुए अपना वोट दें।

अनंतनाग में गत रोज सिर्फ 13.63 प्रतिशत मतदान हुआ है। हालांकि, वर्ष 2014 में संसदीय चुनाव के दौरान जिला अनंतनाग में ही करीब 40 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि पूरे क्षेत्र मे मतदान 29 प्रतिशत रहा था। बुधवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पुलवामा और जिला शोपियां में रैलियां की हैं। इन दोनों जिलों में पीडीपी का प्रभाव जिला कुलगाम की अपेक्षा ज्यादा है। नेकां के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने नेकां प्रत्याशी हसैन मसूदी के पक्ष में कुलगाम में रेलियां की हैं। कांग्रेस उम्मीदवार जीए मीर ने भी कुलगाम, मंजगाम, नाडीमर्ग समेत करीब छह कस्बों में छह रैलियों को संबोधित किया।
 
राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, पुलवामा और शोपियां में कांग्रेस, नेकां, भाजपा व अन्य दलों को पता है कि उनका वोट ज्यादा नहीं है और जो है वह वोड डालने आएगा, लेकिन वह हार जीत में निर्णायक नहीं होगा। उनकी हार जीत को कुलगाम के देवसर, कुलगाम, होमशालीबुग के ग्रामीण अंचलों में मतदान तय करेगा। इसलिए जीए मीर और उमर अब्दुल्ला ने आज कुलगाम में रैलियां की हैं। उन्होंने अपनी रैलियों में भाजपा को कम, पीडीपी को ज्यादा निशाना बनाया है। उन्होंने दक्षिण कश्मीर में जारी हिंसाचक्र,आतंकवाद से लेकर धारा 370 व 35ए को लेकर पैदा विवाद तक पीडीपी-भाजपा की मिलीभगत को जिम्मेदार बताया। मतलब साफ है कि वह इन इलाकों के लोगों में पीडीपी के प्रति जो नाराजगी है,उसे उभार कर ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाना चाहते हैं। यह लोग जानते हैं कि पुलवामा और शोपियां में मतदान ज्यादा नहीं होगा।
 
कश्मीर मामलों के विशेषज्ञों के बकौल पुलवामा, कुलगाम और शोपियां में होने वाला मतदान बहुत अहम है। पुलवामा और शोपियां में अगर मतदान 60 से 70 प्रतिशत होता है तो पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की जीत पर दांव लगाया जा सकता है। अगर इन जिलों में मतदान का प्रतिशत 30 प्रतिशत से नीचे रहता है तो उनकी हार की संभावना को किसी भी स्तर पर खारिज करना मुश्किल हो जाएगा। यह दो जिले जमात-ए- इस्लामी के सबसे ज्यादा प्रभाव वाले हैं, इन्हीं दो जिलों में सबसे ज्यादा लड़के बीते तीन सालों में आतंकी बने हैं।